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क्या शेख हसीना की विजय वास्तविक परिवर्त्तन लायेगी?

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क्या शेख हसीन की विजय वास्तविक परिवर्त्तन लायेगी? डॉ. रिचर्ड बेंकिन
अमेरिकी पत्रकार

बांग्लादेश मे देश चुनाव लम्बे अंतराल के बाद हुए इसलिए यह भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल था की वहा पर कौन सा गठबन्धन चुनाव मे विजयी होगा। लेकिन बांग्लादेश की जनता ने इस प्रश्न का उतर शेख हसीना की गठबन्धन को स्पष्ट बहुमत प्रदान करके दे दिया। वाम विचार धारा की तरफ झुकाव रखने वाली गठबन्धन के लिए अच्छी और बुरी दोनो तरह की खबरे है। अच्छी खबर यह है कि गठबन्धन को बहुमत प्राप्त होने की वजह से गलत समझौत्ते नही करने होंगे, बुरी खबर यह कि पूरा विश्व अब बांग्लादेश मे जो भी होगा उसका जिम्मेवार शेख हसीना को ठहराया जायेगा। अवामी लीग को विरासत देश की खराब आर्थिक हालात, भ्रष्टाचारयुक्त प्रशासन, इस्लामी आतंकवाद का बढता प्रभाव और देश मे रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दुओ पर बढता अत्याचार जैसी समस्याओ का सबसे पहले सामना करना पडेगा। इसको दूर करना एक कठिन काम है। अवामी लीग इन समस्याओ को दूर करने के लिए यदि कोई प्रयास करती है तो  उसे विदेशी सहयोग की जरुरत होगी।

 जनवरी 2007 मे बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री बाबर से ढाका स्थित निवास पर मुलाकात की थी, यह मुलाकात सेना के विद्रोह से तीन दिन पहले हुई थी, जिस समय चुनाव स्थगित करने की घोषणा की गयी थी और यह बतलाया गया था कि बीएनपी पार्टी जिससे बाबर सम्बन्धित है, उस वक्त मै बाबर से मुलाकात कर रहा था तब लग रहा था कि चुनाव अपने पूर्व निर्धारित कार्यकर्म के अनुसार सम्पन्न होने जा रहे है, उस वक्त बाबर और उनके अन्य साथी अपनी आगे की रणनीति बनाने मे व्यस्त थे।बाबर ने मुझे से पूछा कि अमेरिका बांग्लादेश को कैसे मदद कर सकता है, हम क्या करे कि बांग्लादेश को अमेरिका से मदद मिले और इस मसले पर मेरे विचार क्या है? इस प्रश्न के उत्तर मे मैने बाबर को बताया कि बांग्लादेश और खास तौर पर बीएनपी को वाशिंग़टन मे बैठे नीति निर्धारको को समझाने मे काफी कठिनायी होगी आपको वाशिंग़टन और विश्व मे किसी अन्य देश से मदद पाने के लिए तीन चीजो पर काबू पाने की आवश्यक्ता है। यह है बढता हुआ भ्रष्टाचार, रुढिवादी इस्लामिक संगठनो का बढता प्रभाव, और महिला ,पत्रकार और अल्पसंख्यको पर जुल्म, जब तक इन पर काबू नही पाया जाता तब तक कुछ भी सम्भव नही है। बीएनपी के शासनकाल के दौरान स्थिति बद से बदतर होती गयी और सरकार देखती रही। अंतरिम शासन के दौरान बाबर खुद हवालात की हवा खा रहे थे। अवामी लीग अक्सर बीएनपी पर यह आरोप लगाती रह्ती थी कि इसने अपन शासन के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियो को बढावा दिया और साथ ही साथ पत्रकारो, अल्पसंख्यक समुदायो पर जुल्म होते रहे और सरकार मूक दर्शक बनकर देखती रही। अवामी लीग के सामने लम्बी राहे है , क्या अवामी लीग अपने वायदे को निभायेगी यह देखने वाली वात होगी। 
 
हमे यह नही भूलना चाहिए कि दोनो दलो पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे है चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद बीएनपी मे चुनाव मे धान्धली का आरोप लगाया।, इस पर अभी गौर करने की आवश्यक्ता है कि अगर अवामी लीग यह सोच रही है कि सरकार मे आने के बाद बीएनपी पर हमला बोलेगी और इस कार्य मे पूरा विश्व उसका साथ देगा तो वह गलतफहमी मे है इससे समस्या सुलझने के बजाय उलझ जायेगी। जब मै ढाका हवाई अड्डे पर उतरा तो शेख हसीना टेलिवीजन पर प्रेस कांफ्रेस कर रही थी और ढाका की गलियो मे आगजनी और लूट पाट हो रहा था। देश मे एक तरह की आम सहमती सी लगती है कि यदि ये दोनो दल आपस मे झगडते रहे और एक दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास मे लगे रहे तो इनका भला हो या नहो पर देश का सत्यानाश हो जायेगा। लेकिन इन दोनो दलो के नेता देश हित के जगह दलो के हितो को तरजीह देते है। अभी ज्यादा वक्त नही बीता है जब अवामी लीग धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत को तिलांजली देकर रुढिवादी संगठन बांग्लादेश खिलाफत मजलिस संगठन से समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके एवज मे मजलिस ने अवामी लीग के उम्मीदवारो के समर्थन मे उलमाओ से फतवा जारी कराया जिससे इअनके उम्मीदवारो को फायदा हो सके। इस समझौत्ते के अंतर्गत यदि अवामी लीग सत्ता मे आती है तो तो वैसे किसी भी कानून को रद्द किया जायेगा जो कुरान के विचारो से मेल नही खाती है साथ ही मदरसा के डिग्री को विश्वविद्यालय, और पब्लिक स्कूल के डिग्री से उपर रखा जायेगा। अवामी लीग के समर्थक यह कहने से नही चुक रहे है कि पार्टी समझौत्ता को मानने के लिए बाध्य नही है।

अवामी लीग अक्सर इस बात का दावा करती है कि वह अल्पसंख्यको की हितैषी है, लेकिन उसके द्वारा किये गये कार्य यह दिखाते है यह हितैषी कम और विरोधी ज्यादा है।ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अब्दुल बरकत ने वीपीए पर सर्वे करया। आपकी जानकारी के लिए यह बताना जरुरी है कि वीपीए पाकिस्तानी दुश्मन कानून का परिवर्त्तित रुप है। जिसके तहत हिन्दू और किसी अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के सम्पत्ति को सरकार अपने कब्जे मे ले सकती है। कानून सरकार को यह शक्ति प्रदान करती है कि गैर मुसलमानो की सम्पत्ति को अपने कब्जे मे लेकर इसका बटवारा मुसलमानो मे अपनी इच्छा अनुसार कर सकती है। सर्वे मे यह दर्शाया गया है कि सरकार किसी की भी रही हो यह काम  सुचारु रुप से जारी रहा। 2001 मे अवामी लीग की सरकार ने वीपीए कानून मे संशोधन किया जिसके तहत इस कानून के अंतर्गत जिसकी भी सम्पत्ति ली गयी उसको लौटाने की व्यवस्था है। परंतु यह कानून नाम का ही है, अभी तक इस पर कोई अमल नही हुआ है। इसका अर्थ यह नही है कि कोई परिवर्त्तन नही होगा। अवामी लीग की सरकार को यह दिखाना होगा परिवर्त्तन सिर्फ शब्दो का नही कार्यो मे भी दिखना है। अभी भी लोगो ने उम्मीद का दामन नही छोडा है , अवामी लीग को जो जबरद्स्त बहुमत मिला है फलस्वरुप  लोगो की उम्मीद काफी बढ गयी है। विजय ने पार्टी को मौका दिया जो पहले कभी नही मिला था, उदाहरण स्वरुप सरकार पर साथी दलो का कोई दवाब नही होगा क्योकि अवामी लीग को खुद का बहुमत है। शेख हसीना ने खुद कहा है कि लोगो की उन्नति और आर्थिक विकास उनकी सर्वोच्च प्रथमिकता होगी। हसीना सरकार की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि आलेख मे जिक्र किए गये समस्याओ से कैसे निपट्ती है। इसके लिए सरकार के नीतियो मे कुछ मूलभूत परिवर्त्तन करने होंगे।

सबसे पहला कदम अवामी लीग सरकार का यह होना चाहिए कि वीपीए काला कानून को खत्म करे और एक आयोग का गठन करके जिनकी  भी सम्पत्ति ली गयी है उसको वापस करने की व्यवस्था करे।  सरकार के अधिकारियो ने भी इस कानून को नजायज बताया है। चुनाव सभा मे अवामी लीग ने इस कानून को एतिहासिक भूल बताया है साथ ही इसको खत्म करने का वादा भी किया है। यह वक्त का तकजा है इसे जल्द से जल्द खत्म किया जाये जितनी जल्दी यह खत्म होगा उससे विश्व मे सन्देश जायेगा कि सरकार काम करने मे विश्वास करती बात बनाने मे नही।देश मे इस्लामिक आतंकवाद को खत्म करने के लिए बांग्लादेशी सरकार को यूएनओ, नाटो से सहयोग लेकर एक व्यापक गठबन्धन बनाकर काबू पाने की कोशिश करनी होगी। एक वक्त था जब बांग्लादेश को उदारवार मुस्लिम देश माना जाता था, साथ ही यह भी समझा जाता था कि यह देश आतंकवाद का विरोध करता है। यह पहले कि बाद है देश मे बीएनपी की सरकार ने रुढिवादी इस्लामिक संगठन को देश मे फलने फूलने का मौका दिया। एक समय तो यह अफवाह जोरो पर थी कि ओसामा बांग्लादेश मे छुपा है। विश्व समुदाय का विश्वास जितने के लिए नयी सरकार इन इस्लामिक संगठनो पर कठोर कारवाई करने की जरुरत है, ताकि बांग्लादेश विश्व के मुख्यधारा मे शामिल हो सके। भारत के साथ खुली सीमा पर भी नियंत्रण रखने की जरुरत है। सीमा का आतंकवादी खुले तौर पर उपयोग करते है और दोनो देशो की सरकारे देखती रह जाती है। मैने दोनो देशो की सीमा को काफी नजदीक से देखा है, लोग आसानी से सीमा के आर पार आजा सकते है। यह दोनो देशो के लिए ठीक नही है। अवामी लीग का भारत के साथ मधुर सम्बन्ध है। पहला कदम दोनो देशो को सीमा पर आतंकवादियो के आवाजाही पर कैसे रोक लगे इस पर होना चाहिए।

बांग्लादेश पर्दे के पीछे से मध्यपूर्व संघर्ष मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 2003 मे मैने प्रिय बांग्लादेश लेख छापी थी, जिसमे मैने बताया था कि बांग्लादेश मध्यपूर्व समस्या को सुलझाने मे अपनी अनोखी भूमिका अदा कर सकता है। लेकिन उस वक्त वहा पर बीएनपी की सरकार थी जिसका झुकाव इस्लामिक गुटो के तरफ अधिक था, इस लिए बात आगे नही बढ पायी थी। अब हालात बदल गये है ,अवामी लीग की सरकार आ गयी है। मेरे विचार से इस बात का प्रयास होना चाहिए कि बांग्लादेश देश और इजरायल के सम्बन्धो मे सुधार हो, इसका अर्थ यह नही है कि बांग्लादेश फिलस्तीन और साऊदी अरब से अपने सम्बन्ध खराब करे दोनो देश  से सम्बन्ध रखते हुए भी इजरायल से सम्बन्ध सुधारने के प्रयास होने चाहिए। इससे बांगलादेश उदारवादी मुस्लिम देश के रुप मे प्रस्तुत करने मे भी कामयाब होगा।  सबसे पहले देश मे पुलिस और सैनिक के सहयोग से  सरकार को इस बात का प्रयास करना चाहिए देश मे कानून सम्मत शासन की स्थापना हो। अवामी लीग ने चुनाव अभियान के दौरान वे सारी सही बाते कही है जिससे देश मे रह रहे अल्पसंख्यक मे विश्वास की भावना जग सके। वक्त आ गाया है कि सरकार उसको लागू करने का साहस दिखाये। देश मे हिन्दुओ पर अत्याचार हो रहा है उस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की जरुरत है। हिन्दु ही क्यो ईसाई और अहमदिया समुदायो पर भी हमले हो रहे है, उस पर भी रोक लगायी जाये। समय की मांग है कि अवामी लीग दिखाये की वह कहती ही नही करती भी है।

शेख हसीना की जो शानदार विजयी मिली है उसका उपयोग करते हुए भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए सख्त कानून बनाने के साथ उसको लागू करवाने की भी जिम्मेवारी सरकार पर आ गयी है। साथ ही सरकार विश्व समुदाय से मदद के लिए अपील करे। अवामी लीग के एक समर्थक ने मुझसे कहा कि हम सन्युक्त उद्योग लगाना चाहते है। बांग्लादेश का भविष्य इस बात पर टिका है कि सरकार विदेशी पूंजी को आकर्षित कर पाती है कि नही। बांग्लादेश की प्राकृतिक सुन्दरता जो किसी भी सैलानी को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है उसे आगे रखकर निवेश की बात करनी होगी। साथ ही शेख हसीना को पूरे विश्व को यह दिखलाना होगा कि वह 21वी सदी के बांग्लादेश की प्रधानमंत्री है , जहा पर विदेशी निवेश की अपार सम्भावनाये मौजूद है जरुरत इसके इस्तेमाल करेने की है, क्या हसीना ऐसा करने मे कामयाब हो पायेंगी?

 


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